Friday, March 8, 2013

स्त्री

करूणा और प्रेम के इन्द्रधनुषी रंगों को ,
जीवन के उतार-चढाव के ताने-बाने में ,
        चतुर बुनकर सी 
               धागा-दर-धागा 
                    रिश्तों को बुनती स्त्री**************

                             
                                          चुन-चुन कंटकों से ,
                                       नेह के बिखरे तिनके ,
                                       समेट  नीड  बनाती 
                                बिछोना वात्सल्य का बिछाती स्त्री************

जीवन सरिता में बहती 
नोका की ,पतवार सी ,
प्रवाह-पथ की लोह-चट्टानों को 
आत्मविश्वास और दृढ़ता  से  मोम  करती स्त्री************** .
                                        
                                               प्रकृति की प्रतिश्रुति सी
 ,                                             निस्तब्ध पतझड़ मे
                                              बसंत की आहट सुन        
                                                 ठूंठों से झांकती          
                                                 हरियाली सी स्त्री...............
                                                           

                                                                            महिला-दिवस की शुभ-कामनाओं सहित 
                                     





                                           ,
                                   
         
       
  
.




61 comments:

  1. चम्पक बन में बैठ सखी संग .....
    कुछ मन खोलती .....
    खिलखिलाती ....
    एक तरंग सी ....
    स्त्री ....!!

    बहुत ही सुन्दर प्रभावशाली प्रस्तुति .....कुछ यादें महका गयी ....!!
    शानदार रचना ....
    .......शुभकामनायें .......!!

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    1. धन्यवाद अनुपमा.......

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  2. प्रकृति की प्रतिश्रुति सी
    निस्तब्ध पतझड़ मे
    बसंत की आहट सुन
    ठूंठों से झांकती
    हरियाली सी स्त्री..........

    अद्धभुत अभिव्यक्ति !!
    महिला-दिवस कीशुभकामनायें !!

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    1. धन्यवाद विभा जी.............

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  3. प्रकृति की प्रतिश्रुति सी
    निस्तब्ध पतझड़ मे
    बसंत की आहट सुन
    ठूंठों से झांकती
    हरियाली सी स्त्री...
    बेह्तरीन अभिव्यक्ति.शुभकामनायें.
    http://madan-saxena.blogspot.in/
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    http://madanmohansaxena.blogspot.in/
    http://mmsaxena69.blogspot.in/

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    1. धन्यवाद मदन जी..........

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  4. सुन्दर प्रस्तुति आदरेया--
    शुभकामनायें-
    सादर

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    1. धन्यवाद ,महोदय.....

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  5. चम्पक बन में बैठ सखी संग .....
    कुछ मन खोलती .....
    खिलखिलाती ....
    एक तरंग सी ....
    स्त्री ....!!

    बहुत उम्दा प्रभावी प्रस्तुति,,,

    Recent post: रंग गुलाल है यारो,

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    1. धन्यवाद,महोदय..........

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  6. प्रकृति की प्रतिश्रुति सी
    , निस्तब्ध पतझड़ मे
    बसंत की आहट सुन
    ठूंठों से झांकती
    हरियाली सी स्त्री...........

    अनुपम भाव लिये उत्‍कृष्‍ट प्रस्‍तुति

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    1. धन्यवाद...आभार...
      आपका..........

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  7. बिछोना वात्सल्य का बिछाती...उम्दा

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    1. आभार राहुल जी ..............

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  8. वाह... उम्दा, बेहतरीन अभिव्यक्ति...बहुत बहुत बधाई...

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    1. धन्यवाद.........प्रसन्न जी .....

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  9. मार्मिक और सटीक चित्रण - अति सुंदर

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    1. धन्यवाद राकेश जी ...........

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  10. स्त्री के बिना कुछ नहीं है, वो तो सृष्टिकर्ता है।
    बेहद सुन्दर रचना है आपकी .
    सादर शुभकामनाएं

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    1. धन्यवाद मधुरेश जी ...........

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  11. सुंदर अभिव्यक्ति....

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    1. धन्यवाद,मार्क जी..........
      आभार.........

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  12. बेहतरीन अभिव्यक्ति.
    महिला-दिवस की शुभ-कामना

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    1. धन्यवाद,रमाकांत जी.....
      आभार.............

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  13. प्रकृति की प्रतिश्रुति सी
    , निस्तब्ध पतझड़ मे
    बसंत की आहट सुन
    ठूंठों से झांकती
    हरियाली सी स्त्री...............

    kitna behtareen shabd diya aapne...
    superb.. fantastic..
    gajab ka likhte ho aap..:)
    shubhkamnayen..

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    1. धन्यवाद ,मुकेश जी ......
      आभार ..........

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  14. आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति मंगलवारीय चर्चा मंच पर ।।

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    1. धन्यवाद....महोदय .......आभार.

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  15. जेठ में ठंढी फुहार सी
    माँ के दुलार सी
    बहन के प्यार सी
    गोरी के श्रृंगार सी.
    सरिता की चंचल धार सी
    समंदर के आधार सी
    विभिन्न रूप दिखाती स्त्री.
    आपको स्त्री होने की और महिला दिवस की ढेर सारी बधाइयाँ.
    सादर
    नीरज 'नीर'

    KAVYA SUDHA (काव्य सुधा): KAVYA SUDHA (काव्य सुधा)

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  16. बहुत उम्दा प्रस्तुति आभार

    आज की मेरी नई रचना आपके विचारो के इंतजार में
    अर्ज सुनिये

    आप मेरे भी ब्लॉग का अनुसरण करे

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  17. करूणा और प्रेम के इन्द्रधनुषी रंगों को ,
    जीवन के उतार-चढाव के ताने-बाने में ,
    चतुर बुनकर सी
    धागा-दर-धागा
    रिश्तों को बुनती स्त्री**************
    स्त्री ही मकान को घर बनाती है ,आप भी मेरे ब्लोग्स का अनुशरण करें ,ख़ुशी होगी
    latest postअहम् का गुलाम (भाग तीन )
    latest postमहाशिव रात्रि

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    1. धन्यवाद ...महोदय.....आभार...

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  18. bahut sundar prastuti :-) badhai

    मेरी नई कविता Os ki boond: झांकते लोग...

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    1. धन्यवाद ...पंखुरी जी ...आभार...

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  19. बेहतरीन अभिव्यक्ति.

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    1. धन्यवाद महोदय...........
      आभार ........

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  20. बहुत सुंदर भावसुधा बरसाती पंक्तियां...

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    1. This comment has been removed by the author.

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    2. धन्यवाद....अनिता जी...
      साभार.....

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  21. सुचना ****सूचना **** सुचना

    सभी लेखक-लेखिकाओं के लिए एक महत्वपूर्ण सुचना सदबुद्धी यज्ञ


    (माफ़ी चाहता हूँ समय की किल्लत की वजह से आपकी पोस्ट पर कोई टिप्पणी नहीं दे सकता।)

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    Replies
    1. धन्यवाद ,रोहितास जी ....आभार...

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  22. सुचना ****सूचना **** सुचना

    सभी लेखक-लेखिकाओं के लिए एक महत्वपूर्ण सुचना सदबुद्धी यज्ञ


    (माफ़ी चाहता हूँ समय की किल्लत की वजह से आपकी पोस्ट पर कोई टिप्पणी नहीं दे सकता।)

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  23. चुन-चुन कंटकों से ,
    नेह के बिखरे तिनके ,
    समेट नीड बनाती
    बिछोना वात्सल्य का बिछाती स्त्री***

    स्त्री के कोमल मन की अनुपम भावनाओं को सुन्दर शब्द दिए हैं आपने ...
    बधाई ...

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    1. धन्यवाद दिगम्बर जी .....
      आभार...

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  24. Replies
    1. धन्यवाद....अज़ीज़ जी ...
      साभार....

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  25. वास्तव में नारी होने पर गर्व होता है ....

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    1. धन्यवाद....सरस जी ....
      साभार...

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  26. बहुत ही सुन्दर भावपूर्ण प्रस्तुति,आभार.

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    1. धन्यवाद....राजेंद्र जी....
      साभार....

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  27. जीवन सरिता में बहती
    नोका की ,पतवार सी ,
    प्रवाह-पथ की लोह-चट्टानों को
    आत्मविश्वास और दृढ़ता से मोम करती स्त्री************** .
    bahut sundar rachana ke liye badhai !

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    1. धन्यवाद...सुमन जी...
      साभार...

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  28. सुंदर लिखा , बधाई आप को

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    1. धन्यवाद......अवन्ती जी..
      आभार...

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  29. करूणा और प्रेम के इन्द्रधनुषी रंगों को ,
    जीवन के उतार-चढाव के ताने-बाने में ,
    चतुर बुनकर सी बुनती... स्त्री!
    - बहुत सुन्दर !

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    1. धन्यवाद....प्रतिभा जी...
      आभार

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  30. चुन-चुन कंटकों से ,
    नेह के बिखरे तिनके ,
    समेट नीड बनाती
    बिछोना वात्सल्य का बिछाती

    bahut hi prabhavshali rachana lagi .....sadar abhar Poonam ji .

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    1. धन्यवाद त्रिपाठी जी ....
      साभार...

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  31. dhanywaad nisha ji ......
    thanks ,to visit my blog...

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  32. waah...wonderful composition... please visit my blog and join it
    regards
    http://boseaparna.blogspot.in/

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